बांग्लादेश के साथ गंगा जल समझौते के नवीनीकरण में पश्चिम बंगाल ने अपने हितों की सुरक्षा की मांग की
| मुख्य पहलू | विवरण |
|---|---|
| केंद्र में समझौता | गंगा-पद्मा जल बंटवारा समझौता (भारत और बांग्लादेश), जो दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है। यह 30 वर्ष पुराना समझौता है। |
| पश्चिम बंगाल की मांगें | पश्चिम बंगाल की वाजिब जल आवश्यकताओं की पूर्ति सुनिश्चित करना, निचले प्रवाह (डाउनस्ट्रीम फ्लो) की सुरक्षा करना तथा नौवहन, गाद जमाव और पर्यावरणीय चिंताओं का समाधान करना। |
| प्रमुख चिंताएँ | - शुष्क मौसम में जल प्रवाह: फरक्का बैराज के माध्यम से भागीरथी-हुगली नदी तंत्र में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित करना, ताकि पेयजल, सिंचाई और उद्योग की जरूरतें पूरी हो सकें।<br>- नौवहन संबंधी समस्याएँ: हुगली नदी में कम जल प्रवाह से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है और श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह (कोलकाता) पर असर पड़ता है।<br>- गाद का जमाव: इससे बाढ़ और नदी तंत्र का क्षरण होता है।<br>- क्षेत्र में भूजल स्तर में गिरावट एवं आर्सेनिक प्रदूषण। |
| पर्यावरणीय कारक | नए समझौते में नदी कटाव, निचले क्षेत्रों में जल प्रवाह की स्थिरता और गाद जमाव के जोखिम का समाधान करना। |

