मिसिंग जनजाति का अली आइ लिगांग त्योहार
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| चर्चा में क्यों? | असम की मिसिंग जनजाति ने हाल ही में अली अये लिगांग उत्सव मनाया, जो बुआई के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। |
| समुदाय | मिसिंग जनजाति (असम की सबसे बड़ी स्वदेशी समुदाय) |
| तिथि | असमिया महीने फागुन के पहले बुधवार |
| अर्थ | अली अये - बीज और जड़ें, लिगांग - बुआई |
| महत्व | कृषि गतिविधियों की शुरुआत का प्रतीक है और सामुदायिक एकता को मजबूत करता है। |
| रिवाज़ | झंडोत्तोलन (लाइटोम टोमचार), डोनी पोलो (सूर्य और चंद्र देवताओं) की पूजा, और अपोंग (चावल की बीयर), सूखी मछली और मांस जैसे प्रसाद। |
| सांस्कृतिक कार्यक्रम | गुमराग नृत्य, पारंपरिक गीत, और ढोल, ताल, गोंग, गगना जैसे वाद्ययंत्रों का उपयोग करके संगीत प्रदर्शन। |
| निषेध | उत्सव के दौरान हल चलाने या पेड़ काटने की मनाही है। |
| विकास | शुरुआत में एक गाँव का उत्सव था, अब जोरहाट जैसे शहरी क्षेत्रों में भी मनाया जाता है, जबकि पारंपरिक रीति-रिवाजों को बनाए रखा गया है। |
| जनसांख्यिकी | असम में मिसिंग जनजाति की जनसंख्या (2011 जनगणना): ~680,424. |
| धार्मिक मान्यताएँ | डोनी पोलो धर्म का पालन करते हैं (सूर्य और चंद्र की पूजा), जो उनकी कृषि और सांस्कृतिक प्रथाओं को प्रभावित करता है। |

