SC/ST कोटा में उप-वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| घटना की तिथि | 1 अगस्त, 2024 |
| न्यायालय | भारत का सर्वोच्च न्यायालय |
| पीठ | सात-न्यायाधीशों की पीठ |
| निर्णय | अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण पर ऐतिहासिक निर्णय |
| रायें | छह अलग-अलग रायें, पाँच उप-वर्गीकरण के पक्ष में, न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी द्वारा एक असहमति |
| ऐतिहासिक संदर्भ | 1950 में संविधान में आरक्षण शुरू किया गया |
| अनुच्छेद 341 | राष्ट्रपति को जाति, नस्ल या जनजाति को SC के रूप में सूचीबद्ध करने की अनुमति देता है, शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में 15% आरक्षण प्रदान करता है |
| प्रमुख न्यायिक मामले | 1975 पंजाब अधिसूचना, ई वी चिनैया (2004), दाविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य (2020) |
| 2020 का निर्णय | ई वी चिनैया पर पुनर्विचार, अनुसूचित जातियों की सूची में असमानता को मान्यता |
| प्रमुख मुद्दे | 1. SCs का एकसमान उपचार, 2. SC सूची के उप-वर्गीकरण की राज्यों की शक्ति, 3. उप-वर्गीकरण के लिए मानदंड, 4. क्रीमी लेयर सिद्धांत का SCs पर लागू होना |
| बहुमत की राय | राज्य सामाजिक पिछड़ेपन की डिग्री की पहचान कर सकते हैं और विशेष प्रावधान प्रदान कर सकते हैं; उप-वर्गीकरण के लिए कड़े दिशा-निर्देश |
| CJI चंद्रचूड़ का निर्णय | SCs के एकसमान उपचार को खारिज किया, संख्यात्मक प्रतिनिधित्व के बजाय प्रभावी प्रतिनिधित्व पर जोर दिया |
| क्रीमी लेयर सिद्धांत | न्यायमूर्ति गवई और चार अन्य न्यायाधीशों द्वारा समर्थित |

