प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा से भारत-मध्य एशिया संबंध मजबूत हुए
| श्रेणी | प्रमुख विकास |
|---|---|
| कूटनीतिक उन्नयन | व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) स्थापित की गई। विदेश मंत्रियों के माध्यम से नई निगरानी एवं समन्वय व्यवस्था बनाई गई। |
| पुरस्कार एवं सम्मान | द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ओलिय दाराजाली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया गया। |
| ऊर्जा एवं खनिज | भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार के लिए दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति समझौता। महत्वपूर्ण खनिजों के खनन एवं भूविज्ञान के क्षेत्र में सहयोग। |
| व्यापार एवं निवेश | व्यापार बाधाओं को दूर करने पर जोर। प्रमुख क्षेत्र: फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, AI, IT पार्क और स्टार्टअप। |
| चिकित्सा एवं प्रौद्योगिकी | स्वास्थ्य सेवा, जैव-चिकित्सीय अनुसंधान तथा AI/डिजिटल प्रौद्योगिकी में सहयोग। |
| शिक्षा | ITEC के तहत 2,700 उज्बेक नागरिकों को प्रशिक्षण; 400+ ICCR छात्रवृत्तियाँ। नई लाल बहादुर शास्त्री हिंदी छात्रवृत्ति। |
| संस्कृति एवं पर्यटन | सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (2026-2030) और पर्यटन सहयोग (2026-2028)। योग एवं पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में साझेदारी। |
| पर्यावरण | भारत ने अराल सागर के पारिस्थितिक पुनर्वास के लिए 10 लाख डॉलर + तकनीकी सहायता देने का वादा किया, जिसे भारत के ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जोड़ा गया है। |
| विरासत संरक्षण | बौद्ध स्थलों (फयाज़ टेपे एवं कराटेपा) के संरक्षण और पुनर्स्थापना के लिए संयुक्त प्रयास। |
| रक्षा एवं सुरक्षा | ‘दुस्तलिक’ सैन्य अभ्यास; आतंकवाद-रोधी कार्रवाई, साइबर अपराध और मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध सहयोग। |

