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मुख्य पहलूविवरण
घटनामध्य प्रदेश ने भावान्तर योजना को फिर से शुरू किया
योजना का उद्देश्यबाजार में होने वाले नुकसान और फसल क्षति के लिए सोयाबीन किसानों को मूल्य क्षतिपूर्ति प्रदान करना।
मुख्य प्रक्रियाबाजार मूल्यों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के बीच के अंतर को पाटना।
पात्रताकिसानों को MSP से कम कीमत पर बेचने पर मुआवजा पाने के लिए योजना के तहत फसलों का पंजीकरण कराना होगा।
सोयाबीन के लिए MSP₹5,328 प्रति क्विंटल।
राज्य का योगदानमध्य प्रदेश भारत के कुल सोयाबीन उत्पादन का लगभग 50% योगदान करता है।
सोयाबीन फसल की स्थितिखरीफ फसल, वर्षा आधारित फसल जो वर्टीसोल और संबंधित मिट्टियों में उगाई जाती है।
प्रमुख उत्पादक राज्यमध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक।
चुनौतियाँखराब बाजार रिटर्न, प्राकृतिक आपदाएं, पीला मोज़ेक रोग जैसे फसल रोग, भुगतान में देरी, और फसलों की अधिक आपूर्ति
पिछली समस्याएंपहले के कार्यान्वयन (2017) के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई और किसानों को नुकसान हुआ

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