कानू: दक्षिण भारतीय आदिवासी ज्ञान केंद्र का उद्घाटन
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| नाम | काानू |
| अर्थ | सदाबहार जंगल (कन्नड़ और सोलिगा भाषा में) |
| लॉन्च की तारीख | 25 अगस्त |
| स्थान | आदिवासी स्वास्थ्य संसाधन केंद्र (THRC), बी.आर. हिल्स, कर्नाटक |
| संस्थापक | दक्षिण भारतीय आदिवासी समुदाय के नेताओं, विद्वानों और गैर-आदिवासी शोधकर्ताओं का समूह |
| उद्देश्य | दक्षिण भारतीय आदिवासी समुदाय के इतिहास, वर्तमान और संस्कृति पर पहला ज्ञान केंद्र |
| तीन शाखाएँ | 1. कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के आदिवासी समुदायों पर प्रकाशनों वाला पुस्तकालय<br>2. काानू एनोटेटेड बिब्लियोग्राफी (1,200 से अधिक कार्य)<br>3. आदिवासी और गैर-आदिवासी विद्वानों द्वारा सह-लिखित पुस्तक |
| पुस्तकालय का उद्घाटन | 25 अगस्त को आधिकारिक तौर पर शुरू किया जाएगा |
| एनोटेटेड बिब्लियोग्राफी | सितंबर में ऑनलाइन उपलब्ध होगी; वैश्विक स्तर पर मुफ्त में पहुँच योग्य |
| पुस्तक की स्थिति | प्रारंभिक चरण में |
| उत्पत्ति | बी.आर.टी. की तलहटी में मुंटिपल्याया में आयोजित एक लेखन कार्यशाला से प्रेरित |
| मुख्य दृष्टिकोण | विद्वतापूर्ण कार्यों में आदिवासी परिप्रेक्ष्य को शामिल करना |
| चुनौतियाँ | आदिवासी ज्ञान की जागरूकता और पहुँच की कमी |
| उद्धरण | डॉ. सी. मदेगौड़ा: यह साहित्य में आदिवासियों के प्रतिनिधित्व का गंभीरता से विश्लेषण करने का अवसर है। |

