जम्मू-कश्मीर की ‘भैरव यात्रा’ को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage) सूची में शामिल किया गया।
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| घटना | जम्मू-कश्मीर के राजौरी की 'भैरव यात्रा' को राष्ट्रीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (Intangible Cultural Heritage - ICH) सूची में शामिल किया गया। |
| महत्त्व | यह भगवान काल भैरव (भगवान शिव के उग्र स्वरूप) को समर्पित सदियों पुरानी पवित्र शोभायात्रा है। |
| मुख्य अनुष्ठान | एक श्रद्धालु प्रतीकात्मक रूप से 'बाबा भैरव देव' का स्वरूप धारण करता है, शरीर पर काला रंग लगाया जाता है तथा चिमटा (लोहे का चिमटा) धारण करता है। श्रद्धालु उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। |
| अपेक्षित लाभ | सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण, अनुसंधान को बढ़ावा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा विरासत पर्यटन (Heritage Tourism) को प्रोत्साहन। |

