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इंदौर बना भारत का पहला भिखारी-मुक्त शहर

इंदौर बना भारत का पहला भिखारी-मुक्त शहर
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इंदौर बना भारत का पहला भिखारी-मुक्त शहर

पहलूविवरण
घटनाइंदौर को भारत का पहला भिखारी-मुक्त शहर घोषित किया गया।
प्रमुख पहलभिखारियों का रोजगार के अवसर और बच्चों के लिए स्कूल में दाखिला के माध्यम से पुनर्वास।
अभियान की शुरुआतफरवरी 2024 में महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत।
पहचाने गए भिखारियों की संख्यालगभग 5,000 भिखारी, जिनमें 500 बच्चे शामिल हैं।
अभियान के चरणपहला चरण: जागरूकता अभियान। दूसरा चरण: पुनर्वास प्रयास।
अंतर-राज्यीय मुद्दाकई भिखारी राजस्थान से प्रवासन करके आये थे।
मान्यताकेंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा आदर्श परियोजना के रूप में मान्यता प्राप्त।
पायलट प्रोजेक्टभीख मांगने को खत्म करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुने गए 10 शहरों में इंदौर शामिल।
विश्व बैंक की स्वीकृतिविश्व बैंक की टीम ने अभियान के प्रभाव को स्वीकार किया।
औपनिवेशिक कानून1871 का क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट खानाबदोश जनजातियों को अपराधी घोषित करता था।
वर्तमान कानूनी ढांचाभारत का संविधान समवर्ती सूची (सूची III, प्रविष्टि 15) के तहत आवारागर्दी पर कानूनों की अनुमति देता है।
राज्य कानूनकई राज्य बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट, 1959 पर आधारित कानून बनाते हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला2018: बॉम्बे एक्ट को मनमाना और सम्मान के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए खारिज किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला2021: भीख मांगना एक सामाजिक-आर्थिक समस्या है, न कि आपराधिक मुद्दा।
स्माइल (SMILE) पहलआजीविका और उद्यम के लिए सीमांत व्यक्तियों के लिए सहायता (SMILE) 2022 में शुरू की गई।
स्माइल का लक्ष्य2026 तक भिखारी-मुक्त भारत
स्माइल की प्रगति2024 तक, 970 व्यक्तियों का पुनर्वास किया गया, जिनमें 352 बच्चे शामिल हैं।

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