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भारतीय समाचार पत्र दिवस: पत्रकारिता की विरासत

भारतीय समाचार पत्र दिवस: पत्रकारिता की विरासत
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भारतीय समाचार पत्र दिवस: पत्रकारिता की विरासत

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समाचार में क्यों?भारत 29 जनवरी को भारतीय समाचार पत्र दिवस मनाता है, जो स्वतंत्रता पूर्व भारत में पहले समाचार पत्र के आगमन को चिह्नित करता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमिपहला मुद्रित समाचार पत्र, हिकीज बंगाल गजट, 29 जनवरी, 1780 को जेम्स ऑगस्टस हिकी द्वारा कोलकाता (तब कलकत्ता) में शुरू किया गया था।
महत्वयह समाचार पत्रों की भूमिका को मान्यता देता है, जो भारत के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को आकार देने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और जनता के अधिकारों की वकालत करने में सहायक हैं।
सामना की गई चुनौतियाँ1782 में गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स की आलोचना करने के कारण हिकीज बंगाल गजट को बंद कर दिया गया था। ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन ने प्रेस सेंसरशिप लागू की।
समाचार पत्रों का विकासप्रारंभिक समाचार पत्र: बंगाल जर्नल, कलकत्ता क्रॉनिकल, मद्रास कूरियर, बॉम्बे हेराल्ड। ब्रिटिश काल के सेंसरशिप कानून, जिसमें वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट (1878) शामिल है, ने प्रेस की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया।
स्वतंत्रता के बाद का विकासप्रेस जांच समिति (1947) और न्यायमूर्ति राजाध्यक्ष प्रेस आयोग (1954) ने प्रेस सुधारों पर काम किया, जिसके परिणामस्वरूप 1966 में प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) का गठन हुआ।
प्रेस काउंसिल ऑफ इंडियाPCI को प्रेस काउंसिल एक्ट, 1965 के तहत प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए स्थापित किया गया था। इसे आपातकाल (1975) के दौरान भंग कर दिया गया था, लेकिन 1979 में इसे फिर से स्थापित किया गया।

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