भारत ने पाकिस्तान को पानी की आपूर्ति कम की
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| घटना | भारत ने बगलिहार और किशनगंगा बांधों से पाकिस्तान को होने वाले पानी के प्रवाह को कम किया। |
| ट्रिगर (कारण) | पाकिस्तान का बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण (3 मई, 2025) और पहलगाम में आतंकवादी हमला (22 अप्रैल, 2025)। |
| बगलिहार बांध (चिनाब) | स्लूस गेट (Sluice gates) नीचे किए गए; पानी के प्रवाह में 90% की कमी; आधिकारिक कारण: जलाशय का रखरखाव। |
| किशनगंगा बांध (झेलम) | बड़े रखरखाव के लिए प्रवाह पूरी तरह से रोका जाएगा। |
| सिंधु जल संधि (1960) | विश्व बैंक द्वारा मध्यस्थता; 6 नदियों के पानी का आवंटन; पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब) ज्यादातर पाकिस्तान के लिए; पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज) भारत के लिए। |
| रणनीतिक प्रतिक्रिया | सिंधु जल संधि को निलंबित रखा गया; जल शक्ति और गृह मंत्रालय जल नियंत्रण कदमों का समन्वय कर रहे हैं; एनएचपीसी (NHPC) इंजीनियरों को तैनात किया गया; भारतीय बंदरगाहों पर पाकिस्तानी जहाजों पर प्रतिबंध। |
| पनबिजली परियोजनाएं | पाकल दुल (1000 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट), क्वार (540 मेगावाट), रतले (850 मेगावाट); 2027-28 तक पूरा होने का लक्ष्य। |
| महत्व | भारत जल विज्ञान अधिकारों का उपयोग रणनीतिक उपकरण के रूप में करता है; उत्तरी राज्यों को पानी की आपूर्ति बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है; भारत-पाक संबंधों और क्षेत्रीय जल सुरक्षा पर प्रभाव। |

