भारत ने न्यायालयों में बैंकिंग अभिलेखों के आधुनिकीकरण के लिए बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026 पेश किया।
| मुख्य पहलू | विवरण |
|---|---|
| विधेयक का नाम | बैंकर्स बुक्स एविडेंस विधेयक, 2026 (Bankers' Books Evidence Bill, 2026) |
| प्रतिस्थापित अधिनियम | बैंकर्स बुक्स एविडेंस अधिनियम, 1891 |
| उद्देश्य | इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल बैंकिंग अभिलेखों को वैध कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता देकर कानूनों का आधुनिकीकरण करना। |
| प्रमुख परिवर्तन | • इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों (जैसे डिजिटल लेन-देन, CBS, UPI, NEFT, RTGS) को कानूनी साक्ष्य के रूप में मान्यता।<br>• न्यायालयों में डिजिटल साक्ष्यों की स्वीकार्यता से संबंधित अस्पष्टताओं को समाप्त करना। |
| लागू होने का दायरा | बैंकों के अतिरिक्त निम्न संस्थाओं पर भी लागू होगा:<br>• डाक बचत बैंक (Postal Savings Banks)<br>• धन अंतरण (Money Transfer) कंपनियाँ<br>• अन्य वित्तीय संस्थाएँ (सरकारी अधिसूचना के माध्यम से)। |
| महत्त्व | • औपनिवेशिक काल के कानून का स्थान लेगा।<br>• भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप कानूनी ढाँचा प्रदान करेगा।<br>• न्यायिक दक्षता (Judicial Efficiency) में वृद्धि करेगा। |

