ग्वालियर में भारत की पहली स्वयंपूर्ण गौशाला और बायोगैस संयंत्र
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| चर्चा में क्यों? | भारत का पहला आधुनिक और आत्मनिर्भर गौशाला जिसमें कॉम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट ग्वालियर, मध्य प्रदेश में शुरू किया गया। |
| स्थान | आदर्श गौशाला, ग्वालियर, जिसका प्रबंधन ग्वालियर नगर निगम द्वारा किया जाता है। |
| क्षमता | 10,000 से अधिक मवेशियों को रखने की क्षमता। |
| अद्वितीय उपलब्धि | मध्य प्रदेश का पहला CBG प्लांट जो गोबर और जैविक कचरे से बायोगैस का उत्पादन करता है। |
| प्रौद्योगिकी | जैविक कचरे को प्रसंस्कृत करने के लिए विंड्रो कंपोस्टिंग विधि का उपयोग किया जाता है। |
| दैनिक उत्पादन | - बायो-सीएनजी: 100 टन गोबर से 2-3 टन। <br> - बायो-खाद: 10-15 टन। |
| पर्यावरणीय लाभ | - कार्बन उत्सर्जन को कम करता है। <br> - चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है। |
| आर्थिक प्रभाव | स्थानीय रोजगार सृजित करता है और किसानों को सस्ती बायो-खाद प्रदान करता है। |
| सामाजिक प्रभाव | जैविक खेती को प्रोत्साहित करता है। |
| विकास के लिए मॉडल | सतत और आत्मनिर्भर गौशाला के लिए एक अग्रणी मॉडल। |
| बायोगैस संरचना | मुख्य रूप से मीथेन (CH4) और कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)। |

