बिहार ने लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (हाथीपाँव रोग) नियंत्रण में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की
| श्रेणी | विवरण |
|---|---|
| घटना | बिहार ने लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (LF) उन्मूलन के लिए आयोजित प्रथम ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (TAS-1) सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया। |
| महत्व | सर्वेक्षित क्षेत्रों में सामूहिक औषधि वितरण (Mass Drug Administration - MDA) को बंद करने तथा MDA के बाद निगरानी (Post-MDA Surveillance) चरण में प्रवेश करने के लिए बिहार पात्र बन गया। |
| रोग का परिचय | लिम्फैटिक फाइलेरियासिस (LF) एक उपेक्षित उष्णकटिबंधीय रोग (Neglected Tropical Disease) है, जो मच्छरों के माध्यम से फैलता है और विकलांगता तथा आर्थिक कठिनाइयों का कारण बनता है। |
| मुख्य रणनीति | प्रत्यक्ष पर्यवेक्षित उपचार (Directly Observed Treatment - DOT) के माध्यम से दवाओं के सेवन को स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी में सुनिश्चित किया गया। |
| WHO की भूमिका | विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) तथा बिहार सरकार को प्रशिक्षण, निगरानी, माइक्रोप्लानिंग तथा गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance) में सहयोग प्रदान किया। |

